छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित, मुंगेली जिला के शिक्षा विभाग की खुली पोल

मुंगेली -(लोरमी)- एक तरफ छत्तीसगढ़ सरकार लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर आत्मानंद जैसे इंग्लिश मीडियम स्कूल खोल रही है तो वहीं दूसरी तरफ मुंगेली जिला के स्कूलों की स्थिति सुधरने का नाम नहीं ले रहा है भ्रष्टाचार इतना हावी है कि अब शिक्षक ही मध्यान भोजन जैसे चीजों को कमाई का जरिया बना रहे हैं पूरा मामला लोरमी ब्लाक के शासकीय प्राथमिक शाला गाड़ा पारा का है जहां भोजन गुणवत्ता विहीन परोसा जा रहा है साथ ही धान का कटोरा कहे जाने वाले प्रदेश में किड़ा लगा चावल बच्चों को खाने के लिए दिया जा रहा है अब देखने वाली बात है कि सरकार भोजन में मिलेट और पोषण युक्त भोजन देने का प्लान सिर्फ कागजों में बना रही है या उस जिला अधिकारीयों के भरोसे बना रही है जो कभी ऐसे मामलों में कार्यवाही के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करते हैं वहीं जब निरिक्षण करने उस क्षेत्र के संकुल समन्वयक पहोंचे तो प्रधान पाठक के सिखाए अनुसार समन्वयक से ही छात्राएं सवाल करते नजर आई आपके स्कूल बरमपुर में जब छठवीं पढ़ने वाले ही इंग्लिश नहीं जानते तो हम कैसे जानेंगे छात्र छात्राओं के ऐसे व्यवहार से अधिकारी ही सकते में आ गए वहीं छात्रों का कहना है 2 दिन से वही वही सब्जी खा रहे हैं और 2 दिन से दाल नहीं बना है खाना मेनू के हिसाब से भी नहीं बना है प्रधान पाठक अजीत सिंह राठौर के डर से बच्चे सिखाएं अनुसार ही बोलने लगे, वही अजीत सिंह राठौर द्वारा निरीक्षण में गए पत्रकारों लोगों को ही बोला जा रहा था कि तुम लोग अगर खबर लगाओगे तो मैं भी वीडियो बना लिया हूं तुम्हें झूठे मामले में फसा दूंगा कहकर कहा गया वही पत्रकारों का कहना है कि हमारे ऊपर कुछ भी होता है तो उसका जिम्मेदार स्वयं शासकीय प्राथमिक शाला गाडापारा के प्रधान पाठक अजीत सिंह राठौर होंगे,कहकर बताया गया कवरेज करने गए मीडिया कर्मियों का कहना है कि हमें यहां के स्कूल के बारे में लगातार सूत्रों के हवाले से जानकारी मिल रहा था कि गुणवत्ता हीन मध्यान भोजन बनाया जाता है जिसके बाद में हम लोग स्कूल गए तो कवरेज करने में मध्यान भोजन गुणवत्ता विहीन पाया गया तो मौके पर जिला शिक्षा अधिकारी को फोन के माध्यम से अवगत कराया गया जिसमें जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा आश्वासन दिया गया कि म विकास खंड शिक्षा अधिकारी को मौके पर भेज रही हूं वही शिक्षा विभाग के नोडल अधिकारी जिला पंचायत सीईओ दशरथ सिंह राजपूत को व्हाट्सएप के माध्यम से वीडियो भेज कर अवगत कराया गया

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