योजना की एक हकीकत:1 रु. किलो चावल लेकर निकले गरीब दुकान के अंदर ही दुकान संचालक को 18रु. से 20रु. के हिसाब से बेच रहे है
राजधानी से जनता तक। रायगढ़ / गरीबों को एक रुपए किलो की दर से प्रति व्यक्ति 35 किलो चावल देने वाली योजना बिचौलियों के जाल में फंस रही है। हालात यह है कि कई सोसायटी के आसपास जमे बिचौलिए दुकान से चावल लेकर निकले गरीब को वहीं घेर लेते हैं
लेकिन बिडंबना ये है कि अब शासकीय उचित मूल्य की दुकान
iD क्रमांक 411001025 आईटीआई कॉलोनी के कामता पटेल विक्रेता ही बने खरीददार
और विक्रेता 18से 20 रुपए प्रति किलो की दर से पूरा चावल खरीद रहे हैं।इसे बाद में बाजार में दुगने दाम में बेचकर मुनाफा कमाया जा रहा है। गरीब भी इस चावल के बदले नगद पैसों के लालच में फंस रहे हैं। कल हमारे संवाददाता ने रायगढ़ की
शासकीय उचित मूल्य की दुकान
iD क्रमांक 411001025 आईटीआई कॉलोनी राशन दुकानों की ग्राउंड रिपोर्ट की तो चौंकाने वाले हालात मिले।
वार्ड न. 24 व 25 के अंतर्गत आने वाले शासकीय उचित मूल्य की दुकान जोकि आईटीआई कॉलोनी में संचालित है यह सोसाइटी के संचालक कामता पटेल है जहां देखा गया कि विक्रेता के द्वारा ही हितग्राहियों से 18से 20 रुपए प्रति किलो की दर से पूरा चावल खरीद रहे है । कल गुरुवार को समय 10 से 11बजे के बीच हमारी टीम शासकीय उचित मूल्य की दुकान iD क्रमांक 411001025 आईटीआई कॉलोनी राशन दुकान पहुंची तो विक्रेता के बेटे के द्वारा हितग्राहियों को दिया हुआ चावल को हितग्राहियों के द्वारा राशन दुकान संचालक के बेटे के द्वारा हितग्राहियों का चावल खरीदा जा रहा है इसे बाद में बाजार में दुगने दाम में बेचकर मुनाफा कमाया जा रहा है। गरीब भी इस चावल के बदले नगद पैसों के लालच में फंस रहे हैं।जिला मुख्यालय के कुछ ही दुरी पर सरकारी विपंडन संस्था मर्यादित रायगढ़ अध्यक्ष श्रीमती नीलम पटेल विक्रेता कामता पटेल के द्वारा शासकीय उचित मूल्य की दुकान iD क्रमांक 411001025 आईटीआई कॉलोनी राशन दुकान का संचालन किया जा रहा है कई वार्ड. होने के कारण पर चावल की बिक्री सर्वाधिक होती है। दो-तीन खरीदार यहां पर नियमित रूप से सुबह से खड़े रहते है। चावल कार्डधारी से लेकर वे वाहनों में रखते हैं और ढोते रहते हैं। योजना की एक हकीकत:1 रु. किलो चावल लेकर निकले गरीब दुकान की चौखट के अंदर ही 18रु. से 20 रु.के हिसाब से बेच रहे, अफसर कहते हैं-उनकी संपत्ति है, कुछ भी करें
बेचने वालों का तर्क - शुगर वालों के लिए गेहूं लेते हैं, राशन के लिए नगद जरूरी
गरीबों को एक रुपए किलो की दर से प्रति व्यक्ति 35 किलो चावल देने वाली योजना बिचौलियों के जाल में फंस रही है। हालात यह है कि कई सोसायटी के आसपास जमे बिचौलिए दुकान से चावल लेकर निकले गरीब को वहीं घेर लेते हैं और उससे 18से 20 रुपए प्रति किलो की दर से पूरा चावल खरीद लेते हैं। इसे बाद में बाजार में दुगने दाम में बेचकर मुनाफा कमाया जा रहा है। गरीब भी इस चावल के बदले नगद पैसों के लालच में फंस रहे हैं।
पीडीएस का चावल बेचना और खरीदना दोनों अपराध, विक्रेता व ग्राहक दोनों पर हो सकती है कार्रवाई
सस्ता राशन जिन उपभोक्ताओं को दिया जा रहा है वे उसे यदि बेच रहे हैं तो यह अपराध है। वहीं पीडीएस के राशन को खरीदने वाला खरीदार भी अपराधी होगा। क्योंकि इस प्रकार राशन को खरीद कर बेचना सरकार के उद्देश्य व उसके नियम का उल्लंघन ही है। इसलिए ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। जिले में सरकार द्वारा बीपीएल के अलावा एपीएल हितग्राहियों को राशनकार्ड जारी किये गये है
इन कार्डधारकों द्वारा पीडीएस की दुकान से चावल लेने के बाद बिचौलियों को बेच दिया जाता है। ऐसे बिचौलिए दुकानों के आसपास ही सक्रिय रहते हैं पर दुकान संचालक व खद्य विभाग के अधिकारी इन पर कार्रवाई करने से बचते हैं। दुकानदार तो कार्ड में जिनका नाम होता है उनकी तस्वीर लेने के बाद ही राशन देते हैं, इसलिए वे बच जाते हैं कि बाहर वह अपने सामान का कुछ भी करे। लेकिन विभागीय अधिकारी ऐसे लोगों पर जो सस्ता राशन लेकर बेचते हैं व जो खरीदते हैं उन पर कार्रवाई कर सकते हैं। हमने विक्रेता कामता पटेल को दूरभाष के माध्यम से जानकारी लेनी चाहिए लेकिन विक्रय विक्रेता द्वारा फोन नहीं उठाया गया

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