संवाददाता -चरण सिंह क्षेत्रपाल 

राजधानी से जनता तक।  गरियाबंद/देवभोग - जिला गरियाबंद विकास खण्ड देवभोग में आज बाबा भीमराव अंबेडकर जी की 132 वां जयंती मनाया गया, इस पावन अवसर पर देवभोग विकास खण्ड के सभी पंचायतों से उपस्थित हुए अजा, अजजा,व अन्य पिछड़ा वर्ग के सभी ग्रामीण जनों ने इस जयंती पर पधार कर कार्यक्रम को सफल




बनाएं। यह कार्यक्रम का आयोजन देवभोग सामुदायिक भवन में आयोजित किया गया था।हर वर्ग के वरिष्ठ समाजसेवीओं ने जयंती समारोह में शामिल हों कर बाबा भीमराव अंबेडकर जी के जीवन परिचय को प्रस्तुत किया। जैसे कि भीमराव रामजी आंबेडकर नाम से लोकप्रिय, भारतीय बहुज्ञ विधिवेत्ता, अर्थ शास्त्री, राजनीतिज्ञ और समाज सुधारक थे। उन्होंने दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया और अधूतो से सामाजिक भेद भाव के विरुद्ध अभियान चलाया था। श्रमिकों, किसानों, और महिलाओं के अधिकारों का समर्थन किया था।

बाबा भीमराव अंबेडकर जी का जन्म 14अप्रैल 1891 को म.प्र. सैन्य छावनी के महू में हुई थी। और इनकी देहान्त 6 दिसम्बर 1956 नई दिल्ली में हुई थी। पिता -रामजी मालो सकपाल, मां भीमा बाईं सकपाल, पत्नी सविता आंबेडकर, विवाह 1948 को हुई थी। बाबा भीमराव अंबेडकर उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए कोलंबिया विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात लाॅ की शिक्षा के लिए लंदन विश्वविद्यालय में ला की डिग्री हासिल कर भारत देश वापस आए। बाबा भीमराव अंबेडकर जी के पिता इंडियन आर्मी में सुबेदार थें। न्याय के जननायक बाबा जी के और भी परिवार थें भाई बाला राव, आंनद राव,बहन मंजुला, तुलसी,रामा बाईं, गंगा बाई,दादा जी मालो जी सकपाल। इनके जाति है अजा महार, धर्म हिन्दू, से बौद्ध धर्म में परिवर्तित हुए। बाबा जी को उच्च वर्ग के लोगों ने हिन भावना से अधूत वर्ग कह कर धार्मिक स्थल, पूजा अनुष्ठान में प्रवेश करने नहीं दिया जा रहा था। यहां तक कि उन्हें स्कूलों में भी भेदभाव किया गया और सभी बच्चों से अलग दूर में बिठाया जाता था। जब प्यास लगती थी तो उन्हें एक उच्च वर्ग का विद्यार्थी दूर से पानी हाथ से गिराकर दिया जाता था। इस क्रूरता देश के निम्न कोटी वर्ग के लोगों पर भी व्यवहार किया जाता था। सबसे अधिक ग्रामीण क्षेत्रों में

छुआ छूत की भावना अधिक प्रचलित था। इस तरह के कुरीतियां गांव में झलकती रहीं,जब बाबा भीमराव अंबेडकर जी ने सामाजिक कुरीतियां व छुआ छूत की भावना को दूर करने के लिए एक कड़ी संघर्ष कर

भारतीय संविधान में सदैव हमेशा के लिए इन तमाम घृणा ,भेदभाव जाति प्रथा को समाप्त कर दिया।

और आज हम खुल कर जी रहे हैं,हर क्षेत्रों में हमें जानें आने व हाथ बंटाने का बड़ा सौभाग्य प्राप्त हुआ। ये सब किसके बदोलत में है सिर्फ बाबा भीमराव अंबेडकर जी के मेहनत से। नहीं तो आज तक हम निम्न वर्ग के लोगों को कुछ भी नहीं मिलता और न ही हर क्षेत्रों में हमें पहले प्रात्र होतें। इस लिए हम सभी देश वासियों ने आज बाबा भीमराव अंबेडकर जी का जयंती बड़ी खुशहाली पूर्वक मनाने का निर्णय लें कर अब तक हम मनाते आ रहे हैं। और मनाते रहेंगे।

जय भीम जय संविधान जय भारत।