विधानसभा क्षेत्र के लगभग 150 बूथों कि ग्राउंड जीरो कहती है 

कांग्रेस लाये नया चेहरा,तभी बंधेगा जीत का सेहरा,,,,


चंद्रपुर_छत्तीसगढ़।।विधानसभा चुनाव 2023 के लिए गरमा -गरमी एवं प्रचार - प्रसार की सघन सुरुवात हो गई है ।वर्तमान की देखें तो भा ज पा लम्बी ठहरीश के बाद एक ओर जंहा संयोगिता युद्धवीर सिंह जूदेव अपनी एड़ी- चोटी करके सघन दौरा कर रही है,वही दूसरी तरफ ओ पी चौधरी का भी दखल चंद्रपुर मे जारी है।

साथ हि साथ भाजपा नेत्री जूदेव अपने अच्छे खासे समर्थकों की टीम तैयार कर टिकट की दावेदारी मे सबसे आगे हैं । वहीं उनके चहेते सलाहकार पीताम्बर पटेल भी भरपुर प्रचार प्रसार मे लगे हुए हैं। भाजपा के और भी ऐसे वरिष्ठ कर्यकर्ता चंद्रपुर राजघराने से लेकर कृष्ण कांत चंद्रा, भोजराम साहू और कई अन्य अपनी संगठन मजबूत करने मे लगे हुए है,जिस प्रकार से भाजपा का एजेंडा है कि स्थानीय और लोकल नये चेहरे को टिकट देने कि जो बात छत्तीसगढ़ प्रभारी भाजपा के द्वारा कही जा रही है। जिससे जिला एवं बूथ स्तर के कार्यकर्ता भी अपने आप के लिए टिकट कि आस लगाए बैठे हैं। 

साथ हि क्षेत्र के कद्दावर नेता नोवेल वर्मा जिन्होंने 2003 मे NCP से चुनाव लड़ कर छत्तीसगढ़ मे 1 सीट जीत की दर्ज करा इतिहास रचा था,वे भी वर्तमान सरकार को घेरते मोर पूंजी,मोर जमा,मोर पैसा वापस करो का उद्देश्य लिए लोगों की दिलों मे छाये हुए है जिन्हे नजरअंदाज करना भी खतरे की चुनौती होगी।

1 बड़ा लोकप्रिय चेहरा , क्षेत्रीय विधायक रामकुमार से नाराज होकर पिछले 3 वर्षों से जमीनी स्तर पर सर्वाधिक मजबूत तैयारी में डॉ संतोष पटेल.भी हर पोलिंग बूथ पर छाए हुए  हैं.

वंही कांग्रेस मे भी ठीक वैसे हि स्थिति बनी हुई है जँहा रामकुमार यादव वर्तमान मे विधायक हैं जो कि पूर्व मे कांग्रेस पार्टी मे कार्यकर्ताओं कि इतनी लम्बी चौड़ी टीम होने के बावजूद भी प्रत्यासी बाहर से लाकर थोपा गया था, वैसे कांग्रेस मे भी विगत साढ़े 4 साल मे विधायक द्वारा कोई भी वरिष्ठ कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को साथ लेकर न चला गया और न हि कोई कांग्रेसी इनसे जुड़े हुए है। ऐसे हि उपेक्षित कांग्रेसी आने वाले चुनाव मे अपना दम खम लगाकर निश्चित रूप से दावेदारी को तैयार बैठे है।उनका कहना है इस बार यदि वरिष्ठ निष्ठावान कांग्रेसी कार्यकर्ता को मौका नही दिया जायेगा तो चंद्रपुर विधानसभा का समीकरण बनाने व बिगाड़ने मे अहम भूमिका रखते है।

चंद्रपुर विधानसभा मे हमेशा से जब भी हार- जीत हुई है उसमे ऐसे हि कार्यकर्ता हार जीत को तय करते आये हैं। यंहा तो कांग्रेस के ऐसे कार्यकर्ता भी हैँ जो उचित प्रत्यासी के अभाव मे भाजपा को भी जिताने से नही चुके हैँ।विश्वस्थ सूत्रों से पता चला है कि कांग्रेस मे वर्तमान समय मे सभी वरिष्ठ कार्यकर्ता एक जुट होकर नये चेहरे के रूप मे वरिष्ठ कार्यकर्ता दुर्गेश जायसवाल को चुनावी मैदान मे उतारना चाहते है।और ऐसा लगता है मानो कार्यकर्ताओ कि अनसुनी करने पर कांग्रेस कि नइया डूबती नजर आएगी।जिसका लाभ शायद बसपा या भाजपा को अच्छे प्रत्यासी मैदान मे उतारती है तो उसको भी मिल सकती है।

 जो कार्यकर्ता भाजपा के हो या कांग्रेस के टिकट न मिलने की स्थिति मे बसपा से टिकट ले आये तो यह अतिशन्योक्ति नही होगी,फिलहाल बसपा ऐसे हि प्रत्यासी की तलाश मे रहती है,अगर ऐसा होता है तो उस स्थिति मे बसपा प्रत्यासी यंहा निर्णायक भूमिका मे होंगे।

हमारी टीम ने कुछ गाँव/नगर अडभार,सकर्रा, मालखरौदा, फरसवानी,कोटमी,टून्ड्री,सपोस और चंद्रपुर सभी जगह लगभग 150 बूथों से आम जन मानस की राय जानने का प्रयास किया गया जिससे ऐसा प्रतीत होता है मानो कांग्रेस पार्टी की स्थिति 2023 के लिए उतनी अच्छी नही,लोगों का कहना है कि भले हि क्षेत्रीय विधायक कांग्रेस से है,लेकिन एक भी वरिष्ठ कार्यकर्ता आज कि तारीख मे संतुस्ट नही है जिसका कारण कांग्रेस सरकार कि महत्वकांक्षी योजना है,जिसे आम जन मानस तक पहुंचना चाहिए था उसका आम जन मानस तक नही पहुंचना और केवल व्यक्ति विशेष अपने चहेतों तक हि समेट कर रख देना। जैसे राजीव युवा मितान क्लब के गठन मे युवा कार्यकर्ताओं के प्रतिभा को निखारने के लिए सरकार कि मंशा थी और उसमे प्रत्येक ग्राम पंचायत के युवाओं को भागीदारी करना था उसमे भी भेदभाव कर पुराने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को तवज्जो नही दिया गया और ठीक वैसे हि सेवा सहकारी समितियों को भंग करके जो अध्यक्ष का चयन- मनोनयन हुआ उसमे भी वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को कोई तवज्जो नही दी गई वरन् अन्य पार्टी से सम्बन्धित लोगों को मनमाना ढंग से उनकी पीठ थपथपाकर उनको स्थापित किया गया है तथा ऐसे हि मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट नरवा,गरुवा,घुरवा बारी के तहत जितने गौठान हैँ उसमे भी जो महिला समूह कि भागीदारी कि गई है,वह या तो वंहा कि पूर्व से भाजपा शासनकाल से जो जमे हुए समूह है उन्ही को या जँहा भी बदलाव किया गया है वंहा केवल अपने चहेते महिला समूहों को पुरस्कृत करते किया गया है साथ हि साथ अभी हाल हि मे कुछ उचित मूल्य कि दुकानों के आबन्टन मे भी ऐसा हि भेदभाव देखने मिला है जबकि कांग्रेस के जो मूल कार्यकर्ता हैँ वे आज कि स्थिति मे अपने आप को उपेक्षित महसूस कर रहे हैँ जिसका खामियाजा आने वाले दिनों मे यदि प्रत्यासी दोहराया जाता है तो निश्चित रूप से पार्टी को भुगतना पड़ेगा। और यदि कोई नया चेहरा सामने लाती है तो निश्चित हि वरिष्ठ कार्यकर्ता एक जुट होकर पार्टी को चुनाव मे मजबूती देकर बहुमत से जिताएंगे।।