देवभोग-समाज सेवक एवं समाज प्रवक्ता चवनलाल बघेल ने कहा कि मानव जाति की उन्नति हर समय होती रहेगी।
कौन है जो उसको रोक सके?
समाज- संगठन का प्रथम और प्रमुख कार्य विचार - क्रान्ति की भूमिका प्रस्तुत करना है।
व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण और समाज निर्माण की त्रिविधि क्रिया - प्रक्रिया सम्पन्न करते हुए भव्य समाज के अभिनव निर्माण के लिये बढ़ - चढ़कर शौर्य, साहस, दिखाया जाय इसी में हमारा गौरव है।
भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा छत्तीसगढ़ शोध एवं नीति प्रदेश सह प्रभारी चवनलाल बघेल ने बताया कि सामाजिक सुव्यवस्था का एकमात्र उपाय लोकमानस में गहराई तक घुसी हुई अवांछनीयता की जड़ों पर लगातार फावड़ा चलाया जाय और उसे पूरी तरह उखाड़कर फेंक दिया जाय।
जन - जन को मानवी गरिमा का स्वरूप समझाने, अभ्यास कराने और उसकी सुखद प्रतिक्रिया को प्रत्यक्ष करने केलिए ऐसा प्रयास किया जाय जैसा किसी समय संविधान के निर्माता डॉ भीमराव अम्बेडकर ने किया था।
प्रेस वार्तालाप पर भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा जिला धमतरी प्रभारी चवनलाल बघेल जी ने बताया कि -
" प्रेस ही है जो लोकतंत्र की जड़ों को सींचता है और विकास की बात समाज के साथ करता है।
क्योंकि हम सब प्रतिदिन तरंग शक्ति की भांति करें ' बातचीत ' या अपनी समाज की बात।
संगठनात्मक, प्रचारात्मक, रचनात्मक और संघर्षात्मक कार्यक्रमों में उत्साह पूर्वक अपना भावभरा योगदान समस्त अनुसूचित जातियों के युवाओं को देना चाहिए।
सामाजिक सुधार और महापुरुष ज्योति राव फुले के विचार है कि ईश्वर एक है और वही सबका कर्ता - धर्ता है।
महापुरुष डॉ भीमराव अंबेडकर ने बताया है कि हर समस्या का समाधान ढूंढा जा सकता है।
हमें समस्याओं से घबराना नहीं चाहिए अपितु स्वर्णिम भविष्य की आशा से उनसे जुझना चाहिए।
उन पर विजय प्राप्त करना चाहिए ।
अन्धविश्वासों , रुढ़ियों एवं सड़ी - गली मानसिकता को दूर कर समाज को नयी रोशनी प्रदान करना है।
हम चाहें तो प्रतिदिन कोई न कोई परोपकार का कार्य कर सकते हैं -
किसी अन्धे को रास्ता पार करना,
किसी बीमार को अस्पताल पहुंचाना,
किसी गरीब सहपाठी की पुस्तकों द्वारा मदद कर देना,
राह चलते किसी प्यासे पथिक को पानी पिला देना आदि सैकड़ों छोटे -छोटे कार्य ऐसे हैं जिन्हें बिना किसी खर्च के किया जा सकता है।
यदि हम दूसरे की भलाई का कोई काम करेंगे तो इससे हमें समाज में यश तो मिलेगा ही साथ ही मानसिक शान्ति और आत्मिक सुख भी प्राप्त होगा।
विचार क्रान्ति का तात्पर्य भ्रष्ट चिन्तन, दुष्ट आचरण का उन्मूलन स्नेह - सद्भाव (सद् भाव) से भरीपूरी उदार नीतिमत्ता का प्रचलन।
यह ही है भव्य समाज के निर्माण का एकमात्र उपाय जिसके निमित्त विज्ञजनों को इन्हीं दिनों कटिबद्ध होना चाहिए।

0 Comments